मेरी आरती प्रभो स्वीकार करो
मेरी आरती प्रभो स्वीकार करो,
मुझे भवसागर से पार करो..
तू ही दाता है पालनहार तू ही,
सारे विश्व का एक आधार तू ही
तेरी महिमा अपार-कोई पाये न पार,
है करूणाकर ! करूणा तो करो, मेरी.......
पत्र पुष्पादि अर्पण करता तुम्हें,
भावनाओं का तर्पण करता तुम्हें
दीन रंक मैं हूँ-तुम्हें दे क्या सकूं,
प्रभो! मंगलमय सब ताप हरो, मेरी .....
दुःख में सबको तू ही तो शक्ति देता है
पीर भगतों की सब हर लेता है
गुण मैं गा न सकूँ-पार पा न सकूँ
गुणातीत विभो सिर हाथ धरो, मेरी.......
तेरी लीला, का क्या गुणगान कहूँ
तेरे उपकारों का क्या बखान करूँ
दीनबन्धु है तू दया सिन्धु है तू
मेरे वंदन प्रभु अंगीकार करो, मेरी........
तेरी पूजा से मन को चैन मिले
दिल में धीरज मुझे दिन रैन मिले शरण आया तेरी हरो बाधा मेरी
है नटनागर भव पार करो, मेरी........
मेरी आरती प्रभो स्वीकार करो, मुझे भवसागर से पार करो...