जय द्वारक भुवना, जय कुण्डल श्रवणा
जय द्वारक भुवना
जय द्वारक भुवना, जय कुण्डल श्रवणा
सिमरण से दुख नासे सब जग तेरी शरणा ॥
सतयुग में प्रभु आये, सनकादि तारे,
बह्मे का प्रण राख्यों, हो हँस अवतार। जय...
त्रेता में प्रभु आये, सिंहाचल गिरिवासी,
अनुसूया के पूजा जीव अनंत उद्धारी ॥ जय...
द्वापर में प्रभु आये, श्याम रूपा
गोकुल गांव में खेले, यशोदा के पूता ॥ जय
कलियुग में प्रभु आये, वेदां यश गाये
चौख़ानी का जीवड़ा सबका गम खाये ॥ जय...
दीन दयाल दुख भंजन, अनाथों के नाथा
सावन शरण तिहारों राखत श्री चरणों पर माथा॥ जय.....
जय द्वारक भुवना, जय कुण्डल श्रवणा ।
सिमरण से दुख नासे सब जग तेरी शरणा ॥