सांवलिया गिरधारी जय जय आरती हो
जय जय आरती हो सांवलिया गिरिधारी,
जय जय मंगल आरती हो सांवलिया गिरधारी जय जय ..
मोर मुकुट पीताम्बर धारी,
कुण्डल गल वैजयन्ती
शंख चक्र गदा पद्म विराजे,
श्रीमन्माया मूर्ति जय जय आरती हो......
अनार पोफल निंबू सीताफल,
धन अमृतफल लाऊँ
नारियल का वीड़ा चढ़ाऊँ,
द्राक्षा नित ओलगाऊँ जय जय आरती हो.....
सेवन्ती मालती चम्पा जूही,
मोगर पुष्प चढ़ाऊँ
पार्यातक का हार गुफाऊँ
दवना नित ओलगाऊँ जय जय आरती...
केसर कस्तूरी जवादि चंदन,
मलयगिर ओलगाऊँ
अगर तगर मैं धूप धुखाऊँ,
सन्दास गुण गाऊँ जय जय आरती हो.......
जय जय आरती हो सांवलिया गिरिधारी,
जय जय मंगल आरती हो सांवलिया गिरधारी जय जय .....