आरती करूं गिरिधर की
आरती करूं गिरिधर की
श्याम सुंदर की प्यारे मोहन की, आरती करूं.......
मोर मुकुट हैं सिर पर जिनके,
कानो में कुण्डल चम-2 चमके
मधुर बांसरी मुख से बाजे कुंज बिहारी की ॥ 1 ॥
गले बैजयन्ती और फूल माला,
बाहु भूषण का साज निराला
म मुद्रिका कंकर चमके प्रभु के अगुंली की ||2||
कटि पीताम्बर जगमग झलके,
निनाद पायल की झनझनके
श्याम वर्ण तनु कोमल निर्मल मूर्ति हैं उनकी ॥3॥
पूर्ण ब्रह्म यदुनन्दन मूर्ति निर्जर
मुनिवर- हरदम ध्याति
जगोद्वारक पालक दूसरा कोई न त्रिलोकी ॥4॥
जगद्गुरू प्रभू चालक प्रभु जी,
जय बोलो सब मिल उनकी
दामोदर कहे मंगल आरती करो सब ईश्वर की ॥5॥
आरती करूं गिरिधर की
श्याम सुंदर की प्यारे मोहन की, आरती करूं