जय श्री कृष्ण देवा
जय श्री कृष्ण देवा, प्रभु जय श्री कृष्ण देवा
अपनी भक्ति दीजों चरणन की सेवा ॥धृ॥
मोर मुकुट पीतांबर गल माला धारी,
कानों में कुण्डल झलके बंसी की छवि प्यारी ॥ जय
आप हो पिता हमारे हम बालक सारे
अपनी दया दिखावो आन खड़े द्वारे ॥ जय श्री ॥
आप हो कृपा के सागर पाप हरण स्वामी,
हम हैं कामी क्रोधी, कपटी, अज्ञानी ॥जय श्री ॥
आप हो दीनों के बधुं भक्तो के प्यारे
जितने शरण में आए आपने सब वारे ॥जय श्री ॥
जय पूर्ण परमेश्वर जय प्रभु कन्सारी,
प्रेमी दास तिहारो, जय गिरिवर धारी ॥ जय श्री ॥
जय श्री कृष्ण देवा, प्रभु जय श्री कृष्ण देवा
अपनी भक्ति दीजों चरणन की सेवा ॥धृ