अब चलो मुरारी, सुरत रूकमन प्यारी
लगी तुम्हारी आशा, मत करो निराशा ।
तुम बिन यह जीव ऐसा,
चंद्र चकोर जैसा लग रही प्रीत तुम्हारी,
मेरा स्वामी लग रही प्रीत तुम्हारी
अब चलो मुरारी, सुरत रूकमन प्यारी(अजी देवा)
इतनी सुनकर बाता, उठ चले अनंता,
वसुदेव उनके साथा चले पवन पन्था मूल पीठ उतरी सवारी,
मेरा स्वामी मूल पीठ उतरी ॥ (अजी देवा)
खबर होई बलरामा, कहां गए घनश्यामा,
नाहिं किसी को मालूमा, चले साज तमामा फौजां निकली हैं भारी,
मेरा स्वामी फौजां निकली भारी (अजी देवा)
भीमक आया मिलने, गले लाया प्रभु ने
जद पूछे यदुराना, जगह कवन ठिकाना उतरो जी अम्बिकापुरी,
मेरा स्वामी (अजी देवा)
हरि कहें सुदेव सो जाके कहीं रूकमन सो
धीर धरों तुम दिल सो, हरि मिलेंगे तुम सों राघव तेरे पग धारी,
अब आए मुरारी ख़ुशी भई रूकमण प्यारी, मेरा स्वामी ॥