अजी अजी बांके चरण
अजी अजी बांके चरण रण मस्तक लीजे,
आरती दत्तदयाल की कीजे ॥
सिंहाचल गिरि शिखर बिराजे,
चहुँयुगी कीड़ा स्वामी अलख अगाघे,
आरती दत्तदयाल की कीजे ॥
अनुसूया गृह लीनो अवतार,
ज्ञान दियो यदुराजा उद्धारे,
आरती दत्तदयाल की कीजे ॥
मुकुट जटा जूट पिंगट साजे,
दण्ड कमण्डलु विभूति विराजे,
आरती दत्तदयाल की कीजे ॥
देह दमन अनुताप अंगारा,
काम क्रोध जाको घूप जो दीजे,
आरती दत्तदयाल की कीजे ॥
रूचिक ऋषि वर मांगत आये,
शाम कर्ण शत पांच पठाये,
आरती दत्तदयाल की कीजे ॥
परशुराम जी को मिले दत्तराये,
बांकी जननीका मान बढ़ाए,
आरती दत्तदयाल की कीजे ॥
अनन्त जीवों के दोष निवारे,
दास "बहादुर " शरण तुम्हारे,
आरती दत्तदाल की कीजे ॥
अजी- अजी बांके चरण रण मस्तक लीजे,
आरती दत्तदयाल की कीजे ॥