जय श्री अत्रिकुमार तेरी जय हो
जय श्री अत्रिकुमार तेरी जय हो
जय श्रीश्याम सुन्दर तेरी जय हो ।
जय हो जय तेरी जय जय जय
हे सुखसागर करूणामय ॥ धृ ॥
जो चल आवे सो फल पावे
मिटे नरक का भय ।
जय श्री अत्रिकुमार तेरी जय हो ॥ १ ॥
संकट हारक, विघ्न निवारक
दूर करो सब भय । जय श्री अत्रिकुमर तेरी जय हो ॥२॥
पाप मिटाओ ताप हटावों
करो सदा निर्भय ।
-जय श्रीअत्रिकुमर तेरी जय हो ॥ ३ ॥
तन से मन से किये वचन से
पाप करो सब क्षय ।
जय श्री अत्रिकुमर तेरी जय हो ॥४॥
दर्शन पाऊं महिमा गाऊँ
रहूं भजन में लय ।
जय श्री अत्रिकुमर तेरी जय हो ॥ ५ ॥
ज्ञानशक्ति दो अनन्यभक्ति दो
मुक्ति मिले अक्षय ।
जय श्री अत्रिकुमर तेरी जय हो ॥ ६ ॥
सुरनर मुनिवर नारद तुम्बर
सन्त कहे जय जय ।
जय श्री अमिर तेरी जय हो ॥७॥