जय श्री चक्रधर जी
जय श्री चक्रधर जी, स्वामी जय श्री चक्रधर जी,
जिस जिस तुज नू ध्याया,
जो जण शरणी आप की आया,
गये जग तो तर जी । स्वामी जय श्री ....
आप हो अजर अनादि, हे अन्तरयामी,
द्वार तेरे ते आए, पार करो स्वामी ॥ जय श्री .........
हे पूरण परमेश्वर, हे व्यापक हरता,
आपदा द्वारा तज के कहो मैं किस दर जां ॥ जय..
मैं पापी अपराधी, दर तेरे आया
दूर हुए सब संकट, दरसन जद पाया ॥ जय श्री ......
है दुख हरण दयामय, हे जग दे पालक
अपनी दया दिखाओ, द्वार खड़े बालक । जय श्री ..
हे भगतां दे प्यारे, सन्तन हितकारी
क्यों प्रभु आपने कीनी, देर मरी वारी ॥ जय श्री ......
दीना बन्धु, हे प्रभु दुख हारी
आपदे नाम तो सदके, बेजर बलिहारी ॥ जय श्री ..
जय श्री चक्रधर जी, प्रभु जय श्री चक्रधर जी
जिस जिस तुज नू ध्याया, जो जण शरणी आप की आया, गये
जग तो तर जी । स्वामी जय श्री ....