तेरी आरती चांपे गौर
तेरी आरती चांपे गौर श्री चक्रधर जी
मैं गावां प्रेम भरी
श्री राजमठ में आसन साजे,
बतीस लक्षणी मूर्ति विराजे ॥
पूरण पार ब्रह्म अवतार,
चक्रधर मैं गावां प्रेम भरी ॥
तेरी आरती...
सिर पर सुन्दर मुकुट विराजे,
गल मोतियों की माला साजे,
पुष्पाभूषण अंग अंग धार,
श्री चक्रधरजी मैं गांवा.......
तेरी आरती...
महिन्द्र पण्डित दर्शन पाया,..ll
देकर ज्ञान तुसां भरम मिटाया.॥
मोक्ष मार्ग किया प्रचार, श्री चक्रधर जी
तेरी आरती...
श्री नागदेव जी का कष्ट मिटाया,
छाती से जब चरण छुहाया.॥
चरण वंदन करें बारम्बार, श्री चक्रधर जी
तेरी आरती...
पांच इन्द्रियों की कर पांच वाती,
भीतर जलती है आत्मज्योति,
'सन्त' भगत करें जय जय कार श्री चक्रधर जी
तेरी आरती..