रूचि रूचि भोग लगाओ रसिया
श्याम रसिया मेरो मन बसिया
रूचि रूचि भोग लगाओ रसिया || ध्रु ||
निर्धन विप्र सुदामा के तंदुल
भाव सहित् तुने खयो रसिया ।1।
ब्रज मण्डल गोपिन के घर घर
माखन चुराये के खायो रसिया ।2।
दुर्योधन के मेवा त्याग्यो ।
साग विदुर घर खायो रसिया |3|
प्रेम से भोग लगाओ मेरे श्याम को
की सब अमृत बन जाये रसिया ।4। ।
जो भी तेरे प्रसाद को पावे ।
सोई तेरो बन जाये रसिया |5|
मीरा के प्रभु गिरिधर नागर
चरण कमल चित्त लायो रसिया |6|