शयन करो महाराज
शयन करोशयन करो महाराज अब प्रभु शयन करो || ||
फूलों की मैं सेज बिछाऊं, मोर पंख का चंवर झुलाऊं ।
सुन्दर बदन विशाल अब प्रभु शयन करो || १ ||
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जीव उद्धारण कारन स्वामी, बहुत फिरे हो अंतरयामी ।
चरण दबाऊं नन्द लाल अब प्रभु शयन करो || २ ||
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वेट पुराण तेरा यश गांवे, फिर भी तेरा अन्त न पावें ।
ऐसे दीन दयाल - अब प्रभु शयन करो || ३ ||
भक्ति- मुक्ति के देवन हारे, भक्तों के हो प्राण प्यारे ।
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दुष्टों के हो काल अब प्रभु शयन करो ||४||
हाथ जोड़कर आरती गाऊं, प्रेम भाव में तुम्हें सुलाऊं ।
ऐसे जगदाधार, अब प्रभु शयन करो ॥५॥
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