॥ मंगलाचरण ॥

॥ मंगलाचरण ॥
श्री परेशाय नमः श्री गुरुवे नमः
श्री सच्चिदानन्दस्वरूप परम अनूप राजाधिराज श्रीकृष्णचन्द्र महाराज के चरण कमलों को बार-बार साष्टांग दण्डवत् प्रणाम करके उस दयालु पूर्णपरब्रह्म भगवान् श्रीकृष्णचन्द्र जी की परम कृपा से परोपकार के लिये और परम सुख की प्राप्ति के लिये मैं अपनी अल्प बुद्धि के अनुसार "श्रीमद्भगवद्गीता ब्रह्मविद्या- योगशास्त्र" सरल हिन्दी भाषा में लिखता हूँ। जो प्राणी प्रातःकाल के समय एकान्त स्थान पर बैठ कर निश्चय करके श्रद्धा पूर्वक इस गीता का पाठ करेगा और दूसरों को सुनावेगा, सो प्राणी इस लोक में मनोवांछित फल पावेगा और जो प्राणी इस गीता जी में बतलाई हुई भगवान श्रीकृष्णचन्द्र महाराज जी की आज्ञा अनुसार अपना आचार-विचार पवित्र रखेगा और श्रीकृष्ण जी की असली मूर्ति का ध्यान करके एकांत में बैठ कर भगवान की लीलाओं को याद करके प्रेम पूर्वक भगवान का नाम स्मरण करेगा, सो प्राणी ब्रह्मा, विष्णु, महादेव तथा माया के भी पार जो अटल मोक्षपद है, उसको प्राप्त करके परमानन्द को पावेगा।
- जयतिराज महानुभाव